Friday, 5 October 2007

निर्मल आनंद के सानिध्य में कुछ लम्हे



अपने दोस्तों से तो अभय जी पहले ही मिल चुके थे। लेकिन दिल्ली में कुछ और भी थे जो निर्मल आनंद को अपने दोस्त की तरह मानते थे। आखिरकार जब ख़बर लगी कि निर्मल मन के ये स्वामी इन दिनों अपने आसपास हैं, तो इससे पहले कि वे वापस मुम्बई के लिए उड़ान भरते, कुछ लम्हे उनके सानिध्य में गुजार लेना लाज़िमी-सा लगा।

यह और बात थी कि वे अपने बारे में अपनी जुबां से कुछ कहने से बचते ही रहे। खोद-खोदकर सामने वाले की पूरी कर्म-कुंडली जान लेने की उनकी उत्सुकता के सामने इसकी गुंजाइश कम ही थी। हम तो बस इस अनुपम सानिध्य का मौका पाकर ही धन्य थे।

चलते-फिरते फोन के कैमरे में कैद कुछ पल:







हम घंटा-डेढ़ घंटा बतियाते रहे। लेकिन इस बतरस में अधिक साथ निभाया अभय जी के बड़े भैया, संजय तिवारी जी ने। अपने हाथों में जाम लिए, मजे ले-लेकर घूंट पीते हुए, ब्लॉगिंग की दुनिया के बारे में गहरी दिलचस्पी लेते हुए।




Tuesday, 4 September 2007

अनूप शुक्ल 'फुरसतिया' जी का दिल्ली आगमन

दिल्ली और राजधानी क्षेत्र के ब्लागर्स के लिये एक अच्छी खबर.
श्री अनूप शुक्ल 'फुरसतिया' जी इस रविवार सितम्बर 9 को दिल्ली होते हुये पुणे जा रहे हैं और दिल्ली में श्री फुरसतिया जी प्रात: दस बजे से दोपहर दो बजे तक दिल्ली के ब्लागर साथियों के साथ होंगे.

तो फिर हम सब अपने दैनिक कार्यक्रम से थोड़ा समय निकालें और मिलें निम्न स्थान पर.

स्थान: 76/2 गढ़ी, प्रथम तल, सन्त नगर मेन रोड ईस्ट आफ कैलाश
नई दिल्ली-110065 फोन: 26486288
समय: प्रात: दस बजे से दो बजे तक 9 सितम्बर 2007.

आपका क्या कहना है?

मैथिली गुप्त

Saturday, 25 August 2007

दिल्ली मे एक और चिट्ठाकार मिलन

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली मे एक चिट्ठाकार मिलन २७ अगस्त, सोमवार को आयोजित किया जा रहा है। सोमवार होने के कारण चिट्ठाकरों के लिये समय निकालना मुश्किल हो सकता है, फ़िर भी इस मिलन की सफ़लता के लिये सभी चिट्ठाकरो/पाठकों के सहयोग की अपेक्षा करता हूँ।

दिन/तारीख: २७ अगस्त २००७/ सोमवार (27th August 2007/ Monday)

समय: दोपहर १ बजे (भारतीय मानक समय) के आस-पास (Around 13:00 h, IST)

स्थान: कैफ़े कॉफ़ी डे (CCD), जनपथ (Cafe Coffee Day, JanPath)

इस मिलन से सम्बन्धित अधिक (अन्य) जानकारी उपलब्ध कराने के लिये मै अमित गुप्ता का आभारी रहूँगा, इसलिये किसी प्रकार का भ्रम होने पर सटीक जानकारी के लिये कृपया उनसे सम्पर्क करें।

-- राम चन्द्र मिश्र

(०-९८३९९-७३५१९)

 

इस चिट्ठे की मेरी प्रविष्टियों पर अपने विचार व्यक्त करने के लिये सभी टिप्पणीकारों का विशेष आभार।

Saturday, 18 August 2007

लखनऊ मे चिट्ठाकर मिलन

भारत के सबसे बडे़ हिन्दी भाषी प्रदेश रहे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे १९ अगस्त २००७,  रविवार (अपरान्ह) से सोमवार २० जुलाई २००७ के मध्य को चिट्ठाकार मिलन की सम्भावना है। इस शहर मे जगह जगह पर बोर्ड लगे हुए हैं जिनमे लिखा है "मुस्कुराइये कि आप लखनऊ मे हैं"। लखनऊ मे भारत के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसन्धान परिषद  की चार प्रमुख प्रयोगशालायें (केन्द्रीय औषधि अनुसन्धान सन्सथान, औद्योगिक विष विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र, राष्ट्रीय वनस्पति विज्ञान अनुसंधान संस्थान और केन्द्रीय औषधीय एवं सगन्ध पौधा सन्सथान) हैं

लखनऊ से हमारे मुख्य चिट्ठाकर डॉ प्रभात टन्डन की अतिव्यस्तता के कारण, इस अनौपचारिक मिलन का स्थान एवं समय अनिश्चित है।

रविवार होने के कारण लखनऊ के चिट्ठा लेखकों पाठकों से निवेदन है कि अपनी उपलब्धता एवं सुझाव तथा विचारों से  मुझे मेरे मोबाइल नम्बर पर SMS या  Call  द्वारा अवगत करायें।

इतनी कम समय-सीमा के साथ सूचना देने के लिये खेद के साथ  आपका

-- राम चन्द्र मिश्र

(983-997-3519)

Tuesday, 14 August 2007

दिल्ली ब्लॉगर भेंटवार्ता

दिल्ली ब्लॉगर समुदाय की एक भेंटवार्ता इस शुक्रवार, 17 अगस्त 2007, को सांयकाल गुड़गाँव में हो रही है। इस समुदाय में सभी अंग्रेज़ी ब्लॉगर हैं, (जहाँ तक मेरा अनुमान है) मैं ही एक से अधिक भाषा में ब्लॉगिंग करने वाला व्यक्ति हूँ। मेरा सोचना है कि दिल्ली में उपस्थित हिन्दी ब्लॉग समुदाय के साथियों को इस समुदाय से जुड़ना चाहिए। यह एक अच्छा मौका है दूसरे ब्लॉगर्स से मिलने और उनको जानने का। लगभग पूरी संभावना है कि मैं इस ब्लॉगर भेंटवार्ता में सम्मिलित हो सकूँगा। इस भेंटवार्ता पर अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें (अंग्रेज़ी लिंक) और अपनी उपस्थिति यदि दर्ज करा सकें तो इसी लिंक पर करा दें।

Wednesday, 8 August 2007

काशी-बनारस-वाराणसी मे चिट्ठाकार मिलन की सम्भावना

शिक्षा और संस्कृति की दृष्टि से  वाराणसी (वरुणा और असी का संगम स्थल) भारत का एक महत्त्वपूर्ण शहर है। मेरी जानकारी के अनुसार अफलातून जी बानारस के सक्रिय हिन्दी चिट्ठाकार हैं। बनारस और उसके आस पास रहने वाले चिट्ठाकारों और  सभी पाठकों  से निवेदन है कि वे ९ या १० अगस्त को यदि थोड़ा समय निकाल सकें तो एक चिट्ठाकार मिलन बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय या उसके आस पास आयोजित हो सकती है।

कृपया अपने चिचारों और सुझावों से अवगत करायें।

--राम चन्द्र मिश्र

इलाहाबाद मे होने वाले आयोजन के लिये इस लिन्क पर क्लिक करें।

धन्यवाद।

Tuesday, 7 August 2007

प्रयाग नगरी इलाहाबाद मे चिट्ठाकार मिलन का आयोजन।

मुझे ये बताते हुये हर्ष हो रहा है कि उत्तर प्रदेश के महत्त्व पूर्ण शहरो मे से एक इलाहाबाद मे एक और हिन्दी ब्लागर मिलन अयोजित होने कि सम्भावना बन रही है। इलाहाबाद के प्रमुख चिट्ठाकारों  से आप परिचित ही होंगे, जिनमें से प्रमेन्द्र प्रताप सिंह (महाशक्ति) , ज्ञानदत्त पाण्डेय जी (मानसिक हलचल) और सन्तोष कुमार पाण्डेय जी (चुन्तन) ने हिन्दी ब्लॉग जगत मे अपनी धाक जमा रखी है। इसलिये इलाहाबाद और उसके आस पास रहने वाले चिट्ठाकारों और  सभी पाठकों  से निवेदन है कि अपने विचारों एवं सुझावों से अवगत करायें।

मिलन का आयोजन व्यक्तिगत, सामाजिक या सार्वजनिक तौर पर किया जा सकता है।

- राम चन्द्र मिश्र

 

मै,  RC Mishra नाम से ३ चिट्ठों पर कभी कभी लिखता हूँ और भारत (जयपुर, जुलाई-२००६), इटली (मई-२००६) तथा बेल्जियम (दिसम्बर-२००६) मे हिन्दी चिट्ठाकारों से मिल चुका हूँ, आने वाले समय (सितम्बर-२००७) मे जर्मनी के चिट्ठाकारों/पाठको से मिलने की इच्छा है।

इस मिलन के आयोजन मे सहयोग के लिये आगरा (श्री प्रतीक पाण्डेय जी) और कानपुर (श्री अनूप कुमार शुक्ल जी) के प्रतिष्ठित चिट्ठाकारों का अग्रिम आभार।

Thursday, 26 July 2007

एकठो और बिलागर मीट

अभी-२ 'कविराज' गिरिराज जोशी जी का ईमेल आया उनके दिल्ली आने और दिल्ली के ब्लॉगर बंधुओं से मिलने संबन्धित जो उनकी दरख्वास्त पर मैं यहाँ छाप रहा हूँ।


प्रिय चिट्ठाकार मित्रों,

मैं दिनांक 28 जुलाई 2007 को सवेरे दिल्ली पहूँच रहा हूँ, ऐसे मैं मेरी हार्दिक इच्छा है कि दिल्ली एवं आस-पास के सभी चिट्ठाकार मित्रों से मुलाकात हो सके। इस हेतु तय समय व स्थान निम्नानुसार है :-


तिथि :- 28 जुलाई 2007
समय :- सांय 4.30 बजे
स्थान :- कनॉट पैलेस के निकट जंतर-मंतर

आपका
गिरिराज जोशी 'कविराज'


जहाँ तक मेरा ज्ञान है, जंतर-मंतर सांय 6 बजे जनता के लिए बंद हो जाता है। तो उसके बाद जिनकी चर्चा आदि जारी रखने की इच्छा हो वे सभी आस-पास किसी और जगह चल सकते हैं, जैसे मोहन सिंह प्लेस स्थित कॉफी होम या किसी कैफे कॉफ़ी डे इत्यादि।

आयोजक 'कविराज' हैं, प्रस्ताव भी उन्हीं का है, मैं केवल उनकी ओर से छाप रहा हूँ और उनके आग्रह पर उनको सलाह थमाया हूँ, इसलिए यदि किसी को कोई आपत्ति है या गरियाना है तो 'कविराज' को पकड़ें। ;)

Friday, 20 July 2007

रविवार २२ जुलाई २००७ को ऑनलाइन ब्लॉगर मीट

सभी साथियों को सूचित किया जाता है कि आने वाले रविवार यानि 22 जुलाई 2007 को पहली आधिकारिक ऑनलाइन ब्लॉगर भेंटवार्ता आयोजित की जा रही है। वार्ता सुबह ११ बजे आरंभ होगी, समाप्त होने का कोई समय (फिलहाल) निर्धारित नहीं है। हाल ही में गूगल टॉक पर हुई भेंटवार्ता में इस बारे विचार हुआ था, तब से इस हेतु योजना बनाई जा रही थी। ऐसा तय हुआ कि नियमित रुप से (साप्ताहिक) ऑनलाइन ब्लॉगर भेंटवार्ताएँ आयोजित होनी चाहिए ताकि जो साथी चिट्ठाकार मिलनों के लिए कहीं जा नहीं सकते वे इन में भाग ले सकें। इसी कड़ी में यह पहली भेंटवार्ता होने जा रही है।

यह वार्ता याहू मैसेंजर पर संपन्न होगी। इसमें भाग लेने हेतु आपके पास याहू आईडी होनी चाहिए, यदि आपके पास याहू पर मेल अकाऊंट है (अधिकतर के पास होता है) तो आप उसका याहू आईडी के रुप में प्रयोग कर सकते हैं। यदि नहीं है तो आप याहू मेल की साइट पर जाकर पाँच मिनट में बना सकते हैं।

याहू मैसेंजर पर हिन्दी (देवनागरी) में टाइप करने के लिए आपको Indic IME की आवश्यक्ता है, इस पर बरहा तथा कुछ अन्य टूल काम नहीं करते। इसके अतिरिक्त IndiChat नामक मैसेंजर प्लगइन का भी प्रयोग किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए परिचर्चा पर यह सूत्र देखें।

इस वार्ता में भाग लेने के लिए अपना याहू आईडी sharma.shrish [AT] gmail.com तथा ved.sanju [AT] gmail.com पर मेल करें तथा रविवार ११ बजे सुबह याहू मैसेंजर पर ऑनलाइन हो जाएँ। आपको कॉन्फ्रैंस रुम में जोड़ लिया जाएगा।

नोट: कृपया अपना मेल पता/आईडी इस पोस्ट पर टिप्पणी में न देकर मेल द्वारा ही भेजें।

इसके अतिरिक्त वॉइस कॉन्फ्रैंस का भी विचार है। इसके लिए आपको केवल एक हैडफोन (माइक+इयरफोन) की आवश्यकता है। एक सस्ता सा हैडफोन ५० से १०० रुपए के बीच में आ जाता है। हाँ डायलअप अकाऊंट पर वॉइस चैट अच्छी नहीं चलती। वॉइस चैट के लिए आपके पास याहू मैसेंजर का US संस्करण होना चाहिए, India वाले संस्करण में इसका विकल्प नहीं है। US संस्करण का डाउनलोड लिंक नीचे दिया है।

याहू मैसेंजर डाउनलोड (९.९५ एमबी)

कोई प्रश्न हो तो टिप्पणी द्वारा पूछ सकते हैं।

-- श्रीश शर्मा, संजीत त्रिपाठी

Wednesday, 18 July 2007

जीतू और श्रीश के साथ दिल्ली के चिट्ठाकार

चिट्ठाकार मिलन,
कनाट प्लेस, नई दिल्ली
18 जुलाई, 2007
सुबह 11 बजे से दिन ढलने तक



जगदीश भाटिया (आईना) और सुजाता (नोटपैड)



नीरज दीवान (की-बोर्ड के सिपाही)


सृजन शिल्पी और जगदीश भाटिया



श्रीश (ई-पण्डित)


अमित गुप्ता और जीतेन्द्र चौधरी-
नारद के दो कर्णधार



तुम इतना जो मुस्करा रहे हो.....

(ये तस्वीरें मोबाइल के कैमरे से ली गई हैं। इस मिलन में ली गई बेहतर तस्वीरों के लिए यहां चटका लगाइए)

Monday, 16 July 2007

चिट्ठाकारों की बैठक [दिल्ली, 18 जुलाई]

प्रिय साथी,

बुधवार (18 जुलाई 2007) को मोहन सिंह प्‍लेस के काफी हाऊस, रिवोली के बगल में.. चिट्ठाकारों की बैठक रखी गई है.

साथियों को कनाट प्लेस रीगल सिनेमा के पास बने रिवोली के पास आना है.. बगल में मोहन सिंह प्लेस है. जगह के बारे में यहां विस्तार से जानकारी ले सकते हैं.

बैठक में आप सभी आमंत्रित हैं. जीतेंद्र चौधरी भी इस बैठक में आएंगे. साथ ही कुछ अन्य साथी भी स्वीकृति दे चुके हैं. बैठक सुबह 11 बजे से सायं चार बजे तक चलेगी. आप अपनी सुविधानुसार आएं. बैठक एक सामूहिक आयोजन हैं, अधिक जानकारी के लिए मुझे मेल, फ़ोन या 93500 21034 पर मैसेज करें.


- नीरज

Sunday, 8 July 2007

ब्लॉगर यात्रा..... अपेक्षित अंजाम

कुछ लोगों की ऐन मौके पीछे हटने की न बदलने वाली फितरत के चलते इस बार की पालमपुर ट्रिप रद्द कर दी गई है।

Monday, 2 July 2007

रन अप टू द जुलाई ब्लॉगर मीट

१४ जुलाई को हो रही हिन्दी की अभी तक की सबसे बड़ी आरगनाईज्ड ब्लॉगर भेंटवार्ता में अब केवल १२ दिन बाकी हैं। हाजिरी लगाने को बोला तो बहुत लोगों ने अपनी-२ कन्फर्मेशन दे दी कि वे आ रहे हैं, लेकिन बहुतों ने अभी नहीं दी है। जिन लोगों की अब तक कन्फर्मेशन आई है वे निम्न हैं:

  1. जीतू भाई

  2. आशीष भाई

  3. श्रीश

  4. संजय भाई

  5. मैथिली जी

  6. मसिजीवी जी

  7. सुनीता जी

  8. अरूण जी

  9. ममता जी

  10. विजेन्द्र विज

  11. मोहिन्दर कुमार

  12. सृजन शिल्पी जी

  13. नीलिमा जी

  14. राजेश रोशन

  15. नोटपैड वाली मैडम जी

  16. घुघूती बासूती जी + 1

  17. ब्रिजेश

  18. कमल



संपर्क बना रहे और सबके साथ ठीक तरह से co-ordinate किया जा सके इसके लिए सभी से hindi bloggers meet गूगल ग्रुप पर रजिस्टर करने का आग्रह किया जाता है। ऊपर दी गई लिस्ट में बोल्ड बंधु या तो पहले से इस ग्रुप के सदस्य हैं या फिर उनको सदस्यता का निमंत्रण भेज दिया गया है। अन्य किसी का ईमेल पता पास न होने के कारण उनको नहीं भेजा जा सका है। इसलिए कृपया ग्रुप पर अपना पंजीकरण करें ताकि आगे का कार्यक्रम आपको ईमेल द्वारा जल्द ही पता चल सके और अन्य किसी संबन्धित चर्चा आदि में भी आप योगदान दे सकें।

आवश्यक सूचना: बहुत से साथियों ने यह आशंका जताई कि क्नॉट प्लेस के केवेन्टर्स के सामने स्थित कैफे कॉफी डे में पर्याप्त जगह नहीं हो पाएगी यदि अनुमान से अधिक लोग आ गए तो। इसलिए विचार विमर्श के बाद सुबह एकत्र होने का स्थान और दोपहर के भोजन का स्थान बदल दिया गया है। नई जानकारी के लिए ब्लॉगर भेंटवार्ता वाली पोस्ट देखें।

Tuesday, 26 June 2007

जुलाई ब्लॉगर भेंटवार्ता - क्या आप आ रहे हैं?

जैसा कि पहले घोषित हो चुका है, 14 जुलाई 2007 को नई दिल्ली में एक बड़े स्तर की ब्लॉगर भेंटवार्ता/चिट्ठाकार सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। पूरा कार्यक्रम उक्त पोस्ट पर देखें।

स्थान आदि को लेकर कुछ बंधु संशय में हैं कि सभी लोग समा पाएँगे कि नहीं। इसलिए आप सबसे निवेदन है कि इस पोस्ट पर टिप्पणी कर अपने आगमन के बारे में निश्चित सूचना प्रदान करें। इसी आधार पर भेंटवार्ता स्थल का अंतिम चुनाव किया जाएगा।

Wednesday, 6 June 2007

जुलाई ब्लॉगर भेंटवार्ता

मुझे यह सूचित करते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि जुलाई में होने वाली एक ब्लॉगर भेंटवार्ता की सूचना मैं अभी से दे रहा हूँ ताकि बंधुजनों को अपने व्यस्त जीवन में से कुछ पल निकालने में आसानी हो।

शनिवार, 14 जुलाई 2007, को दिल्ली में एक ब्लॉगर भेंटवार्ता रखी जा रही है। इसमे दो खास अतिथि ब्लॉगर होंगे; कुवैत से जीतू भाई और अहमदाबाद से इस भेंटवार्ता के लिए खास तशरीफ़ ला रहे संजय भाई। कोलकाता से प्रियंकर महोदय के भी पधारने की आशा है।

कार्यक्रम कुछ इस प्रकार है:

1) सुबह साढ़े दस बजे क्नॉट प्लेस में केवेन्टर्स(Keventor's) के सामने जनपथ पर सरवण भवन और मैक्डोनल्ड के पास और इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप के बाजू में स्थित कैफ़े कॉफ़ी डे में सभी एकत्र हों। ग्यारह बजे तक सब वहीं होंगे।

2) तकरीबन सवा ग्यारह बजे लंच के लिए वहाँ से मद्रास होटल के पास बगल में ही स्थित सरवण भवन में जाया जाएगा। भोजन का स्थान सरवण भवन से बदल कुछ और भी हो सकता है यदि आने वाले बंधुओं का दक्षिण भारतीय खाने का मन नहीं हुआ या फिर यदि सरवण भवन में जगह नहीं मिली तो।

3) लंच के बाद(तकरीबन एक बजे) वापस कैफ़े कॉफ़ी डे में, जहाँ आराम से बैठ चाय/कॉफ़ी की चुस्कियों के साथ भेंटवार्ता आगे बढ़ाई जाएगी।

भेंटवार्ता सांय काल तक चलेगी। सांय काल संजय भाई अहमदाबाद के लिए वापस रवाना होंगे और जो लोग पालमपुर वाली यात्रा पर साथ चल रहे हैं वे अपने अड्डों पर लौट रात्रि में निकलने के लिए तैयार होंगे।

भेंटवार्ता और यात्रा संबन्धी जानकारी के अपडेट हेतु परिचर्चा में यह सूत्र है।

Tuesday, 5 June 2007

ब्लॉगर यात्रा के लिए निमंत्रण

पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी जीतू भाई के भारत आने के उपलक्ष्य में दिल्ली से बाहर घूमने-फिरने का दो दिन का कार्यक्रम बनाया गया है और आप सभी आमंत्रित हैं।

स्थान के तौर पर कांगड़ा की वादियों में स्थित हिमाचल के दार्जिलिंग, पालमपुर को चुना गया है। शनिवार, 14 जुलाई 2007, की रात्रि वातानुकूलित गाड़ी द्वारा दिल्ली से निकलने का कार्यक्रम है और सोमवार, 16 जुलाई 2007(मध्यरात्रि के आसपास) दिल्ली वापसी होगी। पालमपुर के बारे में अधिक जानने के लिए आप यहाँ(अंग्रेज़ी लेख) पढ़ सकते हैं। यात्रा का कुल खर्च तकरीबन ३००० रूपए प्रति व्यक्ति आने की संभावना है।

इस यात्रा के लिए अभी तक ५ लोगों की सहमति मिल चुकी है। यदि आप भी इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं तो कृपया मुझे coolamit [at] gmail [dot] com पर संपर्क करें। यदि आपको यात्रा संबन्धी कोई शंका है तो उसके निवारण हेतु यहाँ टिप्पणी करें, यहीं पर उसके निवारण का प्रयास किया जाएगा।

यात्रा संबन्धी जानकारी के अपडेट हेतु परिचर्चा में यह सूत्र है।

अपडेट: यदि आप यात्रा पर साथ चलने के लिए अपनी कन्फर्मेशन देना चाहते हैं या यदि अपनी पहले की गई कन्फर्मेशन को रद्द करना चाहते हैं तो उस सबके लिए 23 जून 2007 आखिरी तारीख़ है। इस तारीख़ के बाद किसी की कन्फर्मेशन रद्द नहीं की जाएगी, और यदि कोई इस तारीख़ के बाद अपनी कन्फर्मेशन देता है तो उपलब्धता के अनुसार ही उस बन्धु की कन्फर्मेशन ली जाएगी। अपनी कन्फर्मेशन देने या रद्द करने के लिए कृपया उपरलिखित मेरे ईमेल पते पर संदेश भेजें।

Monday, 4 June 2007

दिल्ली NCR चिठ्ठाकार-मीट की पूरी रपट

तीन जून 2007 को दिल्ली NCR ब्लागर्स मीट सम्पन्न हुई जिसमे भाग लेने वाले थे सर्वश्री अफलातून, अविनाश दास, अरुण पंगेबाज, देवेन्द्र वशिष्ठ खबरी, मोहिन्दर कुमार, रंजना भाटिया, राजीव रंजन प्रसाद, सुनील डोगरा, सुनीता शानू, पवन जी, और मैं (मैथिली गुप्त).
सबसे पहले पहुंचने वाले थे अरूण एवं अविनाश. ये तकरीब एक दो मिनट के अन्तर से या साथ साथ ही पहुंचे थे. श्री अफलातून जी को छोड़कर सभी उपस्थित ब्लागर्स निश्चित समय पर पहुंच गये थे . श्री अफलातून जी इस बैठक के लिये अपनी परिषद की गुड़गांव में हो रही कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक से उठकर आये, इस पर भी वे बैठक के थोड़ी देर बाद ही पहुंच गये.
बैठक में यह चिन्ता जतायी गयी कि ब्लागर्स तो बढ़ रहे हैं पर ब्लागिंग के पाठक उस मात्रा में नहीं बढ़ पा रहे हैं. श्री देवेश वशिष्ठ "खबरी" ने बताया कि कैसे हिन्द युग्म अपने पाठकों की सख्यां में वृद्धि करने में सफल हो रहा है. श्री देवेन्द्र जी ने बताया कि वे ओरकुट के माध्यम से भी हिन्द युग्म में अधिकाधिक पाठक संख्यां में वृद्धि करते रहे हैं.
श्री अफलातून ने ब्लगिंग की सर्च एन्जिन फ्रेन्डलीनेस एवं टेक्नोराती के उपयोग पर अपने अनुभव बताये. उन्होंने इस समय श्री अमित गुप्ता की तकनीकी सहायता एवं उनकी अनुपस्थिति को विशेष रूप से याद किया. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे अन्य मीडिया हाउसेज जैसे पीएनएन आदि ब्लागिंग की ओर मुड़ रहे हैं . श्री अफलातून ने यह भी सुझाव दिया कि ब्लागर्स के लेखों को एकत्रित करके विभिन्न छोटे समाचारपत्रों के लिये एक सिंडीकेशन सेवा भी शुरू की जा सकती है. लेकिन वर्तमान में छोटे समाचार पत्रों की संख्या में कमी के कारण इस सुझाव की व्यवहारिकता पर और विचार करने का निश्चय किया गया.
ब्लागिंग में वर्तमान दशा एवं कविता के प्रश्न के उत्तर में श्री राजीव रंजन प्रसाद जी ने निठारी कांड पर अपनी दिल में उतर जाने वाली कविता ओजस्वी स्वर में सुनाई.
श्री मोहिन्दर जी ने हिन्द युग्म के कविता प्रतियोगिता प्रयासों से बारे में विस्तार से बताया. इसमें मोहिन्दर जी ने श्री जयप्रकाश मानस जी के सहयोग का विशेष रूप से उल्लेख किया.
श्री अविनाश जी ने हिन्दी ब्लागिंग के भविष्य को रेखांकित करते हुये कहा कि ब्लागिंग के आने के बाद लेखन पर स्थापित लेखकों का का वर्चस्व टूटा है और ब्लागर्स की सृजनात्मकता स्वीकार होने लगी है. इस पर श्री मोहिन्दर जी ने व्यक्तिगत अनुभव बताये कि पहले पत्र पत्रिकायें जिन लेखकों की रचनायें अस्वीकृत कर देतीं थीं पर ब्लागिंग के बाद ब्लागर्स के लेखन की मांग होने लगी है .
सुश्री सुनीता शानू ने इस तरह की बैठक के सुखद माहौल देखते हुये एक निश्चित अन्तराल पर करते रहने पर जोर दिया. रंजना भाटिया रंजु ने ब्लागर एवं टिप्पणियो के महत्व को रेखांकित किया . इस विषय पर श्री समीर लाल जी के ब्लागर्स को प्रोत्साहन को विशेष रूप से रेखांकित किया गया. सुश्री रंजु भाटिया ने कविता में रदीफ, काफिया और मीटर के महत्व पर भी चुटकी ली.
श्री अफलातून जी ने चिन्ता जताई के पिछले दो महीने में कुछ पुराने ब्लागर्स कुछ कम लिखने लगे हैं. इस बैठक में पुरानी साहित्यिक पत्रिकाओं यथा धर्मयुग, सारिका , दिनमान आदि के योगदान को याद किया गया. श्री अफलातून ने वरिष्ठ चिठ्ठाकार श्री सुनील दीपक जी के पिताजी द्वारा दिनमान में दिये गये योगदान के बारे में भी बताया.
श्री सुनील डोगरा जी ने नये हिन्दी ब्लागर्स को आरही दिक्कतों के बारे में प्रश्न किये. यह प्रस्तावित हुआ कि नये एवं विशेष रूप से भावी हिन्दी ब्लागर्स के लिये एक बडी़ वर्कशाप का आयोजन किया जाये जिससे हिन्दी ब्लागिंग को नये ब्लागर्स एवं बड़ी संख्या में पाठक मिल सकें. सभी सथियों ने इस विचार को कार्यरूप देने की जिम्मेदारी ली.
यह भी तय किया गया कि इस तरह की गोष्ठियां समय समय पर अन्तराल से की जायें.
इस गोष्ठी में सबसे प्रमुख बात यह रही कि ब्लागिंग की में तीखी बहस चलते रहने एवं गोष्टी में सहमति एवं असहमति के स्वरों के बाबजूद माहौल शुरू से आखिर तक एकदम दोस्ताना रहा
इसके फोटो तो आप पहले भी देख ही चुके हैं, फिर भी इन पर एक बार और नजर डाल लीजिये.
सर्वश्री अरुण जी, अफलातून जी एवं अविनाश जी


सर्वश्री राजीव रंजन प्रसाद, पवन जी, सुनीता शानू जी एवं रंजना भाटिया रंजु जी
श्री मोहिन्दर जी, सुनील डोगरा जी एवं देवेन्द्र वशिष्ठ "खबरी"

सर्वश्री सुनीता शानू जी, रंजना भाटिया जी एवं मोहिन्दर जी


सर्वश्री अविनाश जी एवं अरुण जी

Sunday, 15 April 2007

ब्लॉगर के फीड की टैस्टिंग

यह पोस्ट ब्लॉगर के फीड की टैस्टिंग के लिए की गयी है। इस पोस्ट को इग्नोर किया जाए। आज श्रीश भाई के साथ बैठकर उनसे पूछा कि भाई आपकी फीड की सैटिंग कैसी है, तो उन्होने बोला, कि मैने तो अपनी सैटिंग मे सिर्फ़ एक बदलाव किया है, वो भी सिर्फ़ और सिर्फ़ फीड समरी से फुल में।

Monday, 12 March 2007

दिल्ली चिट्ठाकार सम्मेलन पर समापन रपट

रविवार, 11 मार्च, 2007 को नई दिल्ली के कनाट प्लेस में हुई हिन्दी चिट्ठाकारों की बैठक कई मायनों में पिछली बैठकों एवं आपसी मुलाकातों से अलग और खास रही। बैठक में प्रतिभागी रहे अन्य सभी साथी इस बैठक की रपट पहले ही अपने-अपने चिट्ठों पर रोचक और विशिष्ट अंदाज में सचित्र प्रस्तुत कर चुके हैं, जिनकी कड़ियाँ यहाँ एक साथ संकलित हैं:

  • नोटपैड

दिल्ली के ब्लागर्स कैफ़े कॉफ़ी डे में

  • नीलिमा (लिंकित मन)

दिल्ली ब्लॉगर सभा: एक गैरपुरुष नजरिया

  • अमित गुप्ता (दुनिया मेरी नज़र से)

6 घंटे चली दिल्ली की हिन्दी ब्लॉगर भेंटवार्ता

  • जगदीश भाटिया (आईना)

चिट्ठाकार मिलन: कन्फ्यूजन, कॉफी और कोमलता का एहसास

  • मसिजीवी

दिल्ली की मीट यानी हरी घास में दम भर

  • अमिताभ त्रिपाठी (लोकमंच)

चिट्ठाकार मिलन: एक नई पहल

  • अविनाश (मोहल्ला)

दिल्ली ब्लॉगर्स मीट: एक रपट चंद बातें

शायद इस बात से हिन्दी चिट्ठा जगत के पहले चिट्ठाकार दंपति अनूप एवं रजनी भार्गव को विशेष खुशी होगी कि उनकी परंपरा में धीरे-धीरे अब कई दंपति संयुक्त रूप से चिट्ठाकारी की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। अविनाश के साथ उनकी धर्मपत्नी मुक्ता जी भी हमारे साथ बैठक में शामिल हुईं थीं, इसलिए अविनाश की रपट में उनके स्वर को भी फिलहाल शामिल मान लेते हैं। आशा है, जब वह अपना चिट्ठा शुरू करेंगी तो अपनी नई भूमिका में पहली पोस्ट इसी बैठक से जुड़ी बातों के संबंध में लिखेंगी। मुक्ता जी के बारे में नीलिमा जी का यह सूक्ष्म पर्यवेक्षण देखिए:

मुक्ता जी की घास नोचते हुए लगातार की चुप्पी रहस्यमयी थी । सुना है वे भी जल्दी ही ब्लॉग बनाने जा रहीं हैं अब पता नहीं कल की चर्चा से उनके इरादों पर क्या असर हुआ लेकिन मुझे उन्हें देखकर प्रसाद की लाइनें याद आती रहीं ----

मैं रोकर सिसककर सिसककर कहता करुण कहानी

तुम सुमन नोचते सुनते करते जानी अनजानी

बैठक में शामिल अलग-अलग नज़रिये से लिखी रपट तो आप पढ़ ही चुके हैं। यदि नहीं तो जरा गौर फ़रमाइए :

मसिजीवी - हमें मुफ्त में कैफे की शक्‍कर तक मिले, ये तक नीलिमा से बर्दाश्‍त नहीं

नीलिमा - वैसे एक बडा ही खास मुद्दा बीच बीच में लगातार उठा वह यह कि चिट्ठाकार अपनी पत्नियों के कैसे-कैसे और कितने कोप के भाजन बनते हैं और कैसे मैनेज करते हैं। मसिजीवी इस मसले पर सबसे ज्यादा रुचि लेते प्रतीत हुए । स्त्री चिट्ठाकारों के घरेलू हालातों पर चिंता वहां नदारद थी।

एक अन्य नए चिट्ठाकार साथी भूपेन भी हमारे साथ थे, जो बैठक में सबसे कम समय के लिए शामिल रह पाए और शायद इसीलिए उन्हें इसके बारे में अपने चिट्ठे पर कुछ लिख सकने लायक नहीं लगा। लेकिन इसी महिने ही चिट्ठाकारी से जुड़ी हिन्दी में डाक्टरेट नोटपैड ने इस शिकायत का मौका नहीं दिया। वह बकायदा अपना नोटपैड और कैमरा साथ लाई थीं और सबके ई-मेल और मोबाइल नंबर के साथ-साथ कुछ न कुछ महत्वपूर्ण बातें नोट भी कर रही थीं। उनके कैमरे और नोटपैड में क्या दर्ज हुआ, उसका कुछ हिस्सा तो आप उनकी पोस्ट में देख ही चुके हैं और जो हिस्सा वह अभी छिपा गई हैं, शायद उसे आगे कभी अभिव्यक्त करेंगी।

खेद ज्ञापन

बैठक के लिए सही समय पर पहुंचकर भी मैथिली जी को वापस लौट जाना पड़ा, यह बात मुझे अभी तक कचोट रही है। उन्हें सबसे पहले और विशेष तौर पर बैठक में आमंत्रित किया गया था और अपने वायदे के मुताबिक वे पहुँचे भी, मगर .....। मैथिली जी, मुझे माफ़ करेंगे, आपको मेरे कारण एक बार फिर तकलीफ हुई। मैथिली जी की तरह अमित भी बैठक के निर्धारित स्थल पर तय समय से कुछ पहले ही पहुंच चुके थे, लेकिन वे दोनों संभवतया एक-दूसरे से या तो मिल नहीं पाए या एक-दूसरे को पहचान नहीं पाए। बैठक के सिलसिले में मैथिली जी से मेरा संपर्क ई-मेल से ही हुआ था और उनका मोबाइल नंबर भी अब मेरे पास सुरक्षित नहीं है। इसलिए कल जरूरत पड़ने पर मैं उनसे मोबाइल पर संपर्क भी नहीं कर सका। जगदीश जी के पास उनका मोबाइल नंबर था, लेकिन जब बैठक में पहुँचने के बाद उन्होंने मैथिली जी से संपर्क किया तब तक वह लौटकर काफी दूर जा चुके थे। मेरा मोबाइल नंबर भी केवल जगदीश जी के पास था। कुछ अन्य साथियों के पास मेरा लैंडलाइन नंबर था। इसलिए घर से निकलने से पहले मैंने श्रीमती जी को कह रखा था कि यदि कोई चिट्ठाकार के रूप में अपना परिचय देते हुए घर के नंबर पर फोन करे तो उनको मेरा मोबाइल का नंबर दे देना। अमिताभ जी ने आखिरकार इसी रूट का इस्तेमाल करके मुझसे संपर्क किया।

एक और बात, जो मेरे लिए अत्यंत खेदजनक है कि छ: घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के दौरान कुछ साथी लंच से वंचित रह गए। मैंने हालांकि लंच का प्रस्ताव किया था, लेकिन चर्चा में अधिकतर साथियों का मन इस तरह से रमा हुआ था कि भूख से ध्यान हट चुका था। हमने कॉफी और मिल्क शेक से काम चला लिया। जगदीशजी, अमित और मेरे लिए तो यह कुछ-कुछ डायटिंग जैसा ही मामला हो गया, लेकिन दुबले-पतले अमिताभ जी के पेट में चूहों ने खलबली जरूर मचा दी।

कंफ्यूजन और इंतजार

बैठक से एक दिन पहले मैंने पहले से परिचित चिट्ठाकार साथियों को इस बैठक का प्रस्ताव ई-मेल से भेजा था, जिसमें उनसे बैठक के समय और स्थल के बारे में सुझाव भी देने का अनुरोध किया था। जगदीश जी ने फोन करके सुझाव दिया कि बैठक कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में की जाए। इस पार्क को दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने हाल ही में नए सिरे से सजा-संवार कर आम जनता के लिए खोला है और दिल्ली के युवा युगलों के लिए आजकल यह सबसे हॉट स्पॉट है। वास्तव में, दिल्ली में इस तरह की बैठक के लिए सेंट्रल पार्क हर लिहाज से अत्यंत उपयुक्त स्थल है। लेकिन इसमें एक परेशानी थी, कई चिट्ठाकारों को न तो हम पहले से पहचानते थे और न ही उनका कोई फोटो देख रखा था। उनके फोन नंबर आदि भी हमलोगों के पास नहीं थे। इसलिए हमें ऐसी किसी स्थल का चुनाव करना था, जहाँ हम सभी एकत्र हो सकें। इस मामले में सबसे अधिक अनुभवी हमारे सबसे युवा साथी अमित थे, सो हमने उनकी सलाह को ही अंतिम माना। वह अंग्रेजी ब्लॉगर्स के साथ इस तरह की बैठकें अक्सर करते रहते हैं। उनके सुझाव पर क़ैफे क़ॉफी डे में बैठक रखने का तय किया गया। लेकिन यह मुझे क्या, शायद उनको भी अंदाज नहीं रहा होगा कि कनाट प्लेस में कैफ़े कॉफ़ी डे के तीन-तीन स्टोर होने के कारण, चिट्ठाकारों को सही स्थल तक पहुँचने में कंफ्यूजन का शिकार होना पड़ सकता है। बहरहाल, जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि अमित निर्दिष्ट कैफ़े में काफी देर तक इंतजार करते रहे और मन ही मन हमें कोसते रहे और उधर चंद कदमों दूर दूसरे कैफ़े में महफिल पूरे रंग में जम चुकी थी।

समय की पाबंदी के महत्व को समझने के बावजूद मैं निर्धारित समय से आधे घंटे देर से बैठक में पहुंच पाया। बैठक के संयोजक की जो भूमिका बिना किसी के सौंपे मैंने स्वीकार कर ली थी, उसे निभाने के लिए मेरा समय पर पहुंचना लाजिमी था। हालांकि जहाँ चार चिट्ठाकार पहले से जमा हो चुके हों, बैठक की शुरुआत करने के लिए किसी संयोजक की मौजूदगी जरूरी नहीं रह जाती है। मसिजीवी, नीलिमा, नोटपैड और अमिताभ त्रिपाठी गलत पते और सही वक्त पर पहुंच चुके थे और अनौपचारिकबातचीत में मशगूल हो चुके थे। लेकिन औपचारिक रूप से बैठक के संचालन हेतु संयोजक का मौजूद न होना स्वाभाविक रूप से उन्हें अधीर कर रहा था। इस अधीरता को मैं अमिताभ जी के संक्षिप्त फोन कॉल पर सुनाई दे गई प्रतिक्रिया में भी महसूस कर चुका था। लेकिन मसिजीवी जी की टिप्पणी में छिपे चुटीले व्यंग्य के स्वर ने भविष्य के लिए मुझे सचेत रहने हेतु प्रेरित किया :

पहला बदलाव तो यह था कि मेजबान नदारद थे, और जिनके जैसे तैसे पहुँच जाने भर की उम्‍मीद थी वे बैठे हर मेज पर जाकर कुरेद-कुरेदकर पूछ रहे थे कि भाईसाहब क्‍या आप वो हिंदी ब्‍लॉगर....., फिर हमारा साक्षात्‍कार एक आपत्तिसूचक नकार से होता था। हमें लगा कि ये ब्‍लॉगर मीटिंग कहीं ब्‍लॉगर डेंटिंग में न बदल जाए (जी साहब ब्‍लॉग शोधार्थी थीं ही वहाँ) पर खैर होनी को कौन टाल सकता है। धीरे धीरे ये लोग पहुँच गए....

ऑटो चालक ने मुझे कनाट प्लेस के इनर सर्किल में जिस जगह छोड़ा, वहाँ से गोल-गोल घूमते हुए और सही पता पूछते हुए उस गलत पते तक पहुंचने में दस-बारह मिनट लग गए। सुबह ही मेरे एकलौते साले साहब पधारे थे और आप तो जानते ही हैं कि सारी खुदाई एक तरफ और .......। घर से निकलते-निकलते मुझे अचानक सूझा कि दो-तीन मिनट में ई-मेल भी चेक कर ही लें ताकि पता चल सके कि आखिरकार कौन-कौन साथी आ रहे हैं और कौन नहीं आ पा रहे हैं। मसिजीवी जी ने आने की पुष्टि की थी। नीरज दीवान जी ने ऑफिस में फंसे होने की वजह से आने में असमर्थता जाहिर की थी। मेल चेक करते समय चैट बॉक्स में घुघुतीबासूती जी का संदेश दिखाई दिया, वे पूछ रही थीं कि मीटिंग की तैयारी चल रही है क्या? मेरे पास उनका उत्तर तक देने का समय नहीं था, मेल भी खड़े-खड़े चेक कर रहा था। लंदन से एक वरिष्ठ पत्रकार साथी की मेल थी जो अपने नये चिट्ठे का हिन्दी चिट्ठा जगत से परिचय करा देने के लिए कह रहे थे। (मैंने इसकी सूचना बैठक में उपस्थित साथियों के अलावा चिट्ठाकार समूह और परिचर्चा पर आज दे दी है और उसे नारद से जोड़ा भी जा चुका है।) प्रत्यक्षा जी की तरफ से ई-मेल का कोई प्रत्युत्तर नहीं आया था। अनूप जी ने उनका मोबाइल नंबर भेजा था, लेकिन उस वक्त फोन करने का कोई मतलब नहीं था। आज जब प्रत्यक्षा जी का मेल मिला तो पता चला कि वे सप्ताहांत में अपने कंप्यूटर को भी विश्राम दे रही थीं और कोई मेल ही चेक नहीं किया था।

कैफ़े के ठीक बाहर लंबे अरसे बाद जेएनयू के एक पुराने सहपाठी और अब पत्रकार मित्र मिल गए, मुझे उसमें भी एक भावी चिट्ठाकार नजर आया और मैं उसे इस बात के लिए राज़ी करने में जुट गया कि वह भी पत्रकारों में आजकल तेजी से पनप रहे चिट्ठाकारी के विषाणु से स्वैच्छिक रूप से संक्रमित होने के लिए हमारी बैठक में शिरकत करे। लेकिन शायद वह किसी ख़ास ख़बर की टोह में कनाट प्लेस आया था, तो उस वक्त भला उसे चिट्ठाकारों से क्या सरोकार हो सकता था! बहरहाल, हम जब उस कैफ़े में पहुंचे जहाँ पहुँचना नहीं चाहिए था, तो एक कोने में बैठे दो महिला और दो पुरुष चिट्ठाकार जैसे प्रतीत हुए।


क्या कोई सुनियोजित एजेंडा था
?

कल की इस बैठक का आयोजन बगैर किसी पूर्वयोजना के किया गया था और ऐसा कोई सुनियोजित एजेंडा इसके पीछे नहीं था, जैसा कि कुछ साथियों को शायद महसूस हुआ। किन्तु मेरे मन में इतना अवश्य था कि जब इतने सारे चिट्ठाकार एक साथ मिल रहे हैं तो क्यों न इस अवसर का लाभ उठाते हुए हिन्दी चिट्ठा जगत में इस समय उठ रहे मसलों और चिन्ताओं पर भी कुछ उपयोगी विमर्श कर लिया जाए। फिर भी, मैंने इस बात का भरसक ध्यान रखने की कोशिश की कि अनौपचारिक चर्चा और आत्मीय मेल-मिलाप का मुख्य उद्देश्य बाधित न हो पाए। जब तक आवश्यक महसूस नहीं हुआ, मैंने बातचीत के सहज प्रवाह में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की। फिर भी, कुछ बातें ऐसी हैं जिसे इस बैठक की उपलब्धियों में गिनाया जा सकता है। ये बातें महत्वपूर्ण किंतु कुछ गंभीर किस्म की हैं, जिन पर मैं अपने निजी चिट्ठे पर शीघ्र ही चर्चा करूंगा।


यदि हम साथियों पर अपनी गृह मंत्रियों के बारंबार आ रही फोन कॉलों का दबाव नहीं रहा होता तो शायद बैठक छ: घंटे से भी आगे जारी रहती। कैफ़े कॉफ़ी डे में दो-ढाई घंटा बिताने के बाद हमलोग सेंट्रल पार्क में एक-डेढ़ घंटा बैठे, उसके बाद केवेन्टर्स में मिल्क शेक पीने गए। वहाँ भी खड़े-खड़े आधे घंटे से अधिक चर्चा जारी रही। उसके बाद कुछ साथी तो चले गए, लेकिन अमिताभ, जगदीशजी, अमित और मैं चर्चा जारी रखते हुए लौटकर फिर सेंट्रल पार्क की घास पर आ बैठे। यहाँ तक कि जब वापस अपने-अपने घरों के लिए निकलने के लिए उठे तो पता नहीं किस के सवाल पर नेताजी सुभाष संबंधी मेरे लेखों पर बात चल निकली और फिर हम खड़े-खड़े आधे घंटे से भी ज्यादा बातें करते रह गए। नेताजी के बारे में अमिताभ जी का कौतूहल इतना बढ़ चुका था कि वह मुझे खोद-खोदकर पूछने लगे और तब तक मेरे साथ उस विषय में बातें करते रहे जब तक कि मैं दिल्ली परिवहन निगम द्वारा नई चलाई गई अत्याधुनिक बस में सवार नहीं हो गया।

इस सम्मेलन की अन्यत्र चर्चा:

चिट्ठाकार मिलन: कन्फ़्यूजन, कॉफ़ी और....गर्रर..

चिट्ठाकार मिलन एक नई पहल

पिछले दिल्ली चिट्ठाकार सम्मेलन (6 अगस्त, 2006) की रपट

हिन्दी चिट्ठाकारी के नए दौर का आग़ाज़

Saturday, 10 March 2007

दिल्ली में चिट्ठाकार मिलन की सूचना

सभी चिट्ठाकारों का हार्दिक स्वागत है। इस ब्लॉग पर दुनिया भर में रहने वाले हिन्दी चिट्ठाकारों के बीच आपसी मिलन की सूचना और विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे। यदि चिट्ठाकारों के बीच आपसी मुलाकात या बैठक हो तो उसके बारे में यहाँ पोस्ट के रूप में बताएँ, ताकि हमारा रिश्ता महज ऑनलाइन संबंध तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे बीच प्रत्यक्ष घनिष्ठता भी विकसित हो सके।

दिल्ली में होने वाली चिट्ठाकार मिलन की सूचना

कल यानी रविवार, 11 मार्च 2007 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में रहने वाले हिन्दी चिट्ठाकारों की एक बैठक आयोजित की जा रही है। इसके बारे में विस्तार से यहां देख सकते हैं:

यहां बहुत से नये और पुराने हिंदी के चिट्ठाकार आयेंगे। हम चाहते हैं कि इस क्षेत्र का कोई भी चिट्ठाकार इसमें शामिल होने से छूटे नहीं।
कई साथी चिट्ठाकारों से हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, इसीलिये परिचर्चा और चिट्ठाकार पर इसकी सूचना दी गयी है। इस पोस्ट से यह सूचना नारद पर भी आ जायेगी।

बैठक के समय और स्थान की सूचना निम्नानुसार है:

तारीख : 11 मार्च, 2007 रविवार
समय : 12 बजे मध्याह्न
स्थान : क़ैफे क़ॉफी डे, (वेंगर के निकट), इनर सर्कल, कनाट प्लेस, नई दिल्ली

अब तक जिन साथियों ने शामिल होने की पुष्टि की है, उनके नाम निम्नानुसार हैं:

1. अमित गुप्ता
2. जगदीश भाटिया
3. अविनाश दास
4. अमिताभ त्रिपाठी
5. सृजन शिल्पी
6. मैथिली गुप्त

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में रहने वाले हिन्दी चिट्ठाकार साथियों से निवेदन है कि अधिक से अधिक संख्या में इस सम्मेलन में पहुँच कर इसे सफल बनाएं। अधिक जानकरी के लिए सृजनशिल्पी जी से (srijanshilpi at gmail dot com) सम्पर्क किया जा सकता है।